Thursday, 6 June 2013

पिता

पिता दिखने में एक छोटा सा शब्द हे, लेकिन इसकी महिमा बहुत ही बड़ी हे ! आज हम जिसके बलबूते पर जी रहे हे और शान से यह कह रहे हे की आज मेरे पास सब कुछ हे वह सब पिता का ही दिया हुआ हे ! पिता ने हमें पाला-पोसा और इस काबिल बनाया की हम अपने पेरो पे खड़े हो सके ! वो हमारी जिंदगी के भगवान हे जितनी कीमत आज हमारी जिंदगी में माँ की हे उतनी ही कीमत पिता की हे ! खुद मेहनत करके, भूखे रहकर भी हमें पडाया –लिखाया और जिंदगी को जीना सिखाया ! मेरा तो बस यही कहना हे की बड़े होकर पिता के इस अहसान को भूल मत जाना !


पिता पर एक कविता
पिता जीवन हे, सबल हे, शक्ति हे
पिता सृष्टी के निर्माण की अभिव्यक्ति हे
पिता अंगुली पकडे बच्चे का सहारा हे
पिता कभी कुछ मीठा हे, तो कभी कुछ खारा हे
पिता पालन-पो"kण हे, परिवार का अनुशासन हे
पिता रोटी हे, कपड़ा हे, मकान हे
पिता हे तो बच्चो का इंतजाम हे
पिता से परिवार में प्रतिपल राग हे
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग हे
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति हे
पिता रक्त में दिए हुए संस्कारो की मूर्ति हे
पिता सुरक्षा हे अगर सिर पर हाथ हे
पिता नहीं तो बचपन अनाथ हे
तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो
पिता का अपमान नहीं, अभिमान करो
क्योकि माँ बाप को कभी कोई बाँट नहीं सकता
ईश्वर भी इनके आशी"kksa  को काट नहीं सकता
ईश्वर में किसी भी देवता का स्थान दूजा हे
माँ बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा हे
विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा सब व्यर्थ हे
यदि बेटे के होते हुए माँ बाप असमर्थ हे
वो खुसनसीब होते हे जिनके माँ बाप इनके साथ होते हे

क्योकि माँ बाप के आशी"kksa  के हजारो हाथ होते हे ! 

4 comments:

  1. सुन्दर कविता के माद्यम से सही ही कहा है !

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(8-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  3. पिता की तुलना किसी से नहीं की जा सकती ईश्वर से भी नहीं,पिता को हमने देखा है मगर ईश्वर को नहीं।

    ReplyDelete
  4. माँ धरती है पिता आकाश है - जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती ऍ

    ReplyDelete

अगर यह पोस्ट आपको पसंद आई हो तो अपने विचार दे और इस ब्लॉग से जुड़े और अपने दोस्तों को भी इस ब्लॉग के बारे में बताये !