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Tuesday, 25 June 2013

अनमोल दान : आँखे (कविता)

कविता
मरने के बाद एक नेक काम करते जाईये,
दो अमूल्य मोती का दान करते जाईये !
              इन्हें न जलाये, न खाक में मिलाये,
              इस बेसकिमती धन का दान करते जाईये !
यह चिराग जलने दे, इन्हें मत बुजाइए,
मरने के बाद एक नेक काम करते जाईये !
              अन्धो की जिंदगी में, दर-दर पर हे ठोकर,
              जो काट रहे हे जीवन, नैन बिना रोकर !

बेकार किसी की जान को आसान करते जाईये,
मरने के बाद एक नेक काम करते जाईये !
              सुनी भयानक रात लगे चन्द बिना,
              जेसे बेनूर चेरा लगे आँख बिना !
उजड़े चमन दीप जला फिर बहार लाईये,
मरने के बाद एक नेक काम करते जाईये !
              मोत से बदतर आँखों का अँधेरा,
              मुद्दत से काली रात मिट, फिर हो सवेरा !
ऐसे किसी मजबूर का भगवान् बनते जाईये,
मरने के बाद एक नेक काम करते जाईये !

आज का अनमोल वचन
जीते जी रक्त दान, मरणोपरांत नेत्रदान !
नेत्रदान महादान !............हितेश राठी 


                



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